Prashant Kishor vs Ashok Choudhary: जेडीयू ने सरकारी योजनाओं का श्रेय लेने के लिए तेजस्वी यादव को क्रेडिट चोर करार दिया है, तो एनडीए और महागठबंधन अति पिछड़ा वर्ग के मुद्दे पर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। इसके अलावा, प्रशांत किशोर द्वारा अशोक चौधरी पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों ने भी राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।
पटना: भारतीय राजनीतिक इतिहास के पन्नों पर राजनेताओं की नैतिकता और शुचिता के साथ ईमानदारी की चर्चा होगी, उसमें एक नाम बिहार के सीएम नीतीश कुमार का भी आता है। नीतीश कुमार पर आज तक कोई एक हल्का सा धब्बा भी नहीं लगा पाया। सियासत में सिद्धांत के साथ समझौता और अवसर देखकर इधर से उधर जाना अलग बात है। लेकिन जनता के लिए जीना और जनता के लिए ही सब कुछ करना ये नीतीश के खाते में आता है। आपको याद होगा, जब तेजस्वी यादव पर आरोप लगे, तो नीतीश कुमार ने उनसे दूरी बनानी शुरू कर दी। उन्होंने और उनकी पार्टी ने तेजस्वी यादव से बिंदु वार जवाब मांगा। स्थिति ये हुई कि आखिर में गठबंधन टूट गया और तेजस्वी यादव पैदल हो गए।
पार्टी के अंदर खलबली
बिहार चुनाव से पहले प्रशांत किशोर के सनसनीखेज खुलासे की जद में नीतीश कुमार के काफी करीबी माने जाने वाले अशोक चौधरी आ गए हैं। अशोक चौधरी पीके के आरोपों पर ढंग से सफाई भी नहीं पेश कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा है कि उनकी पत्नी कुछ लेन देने करती होगी। उन्हें पता नहीं है। अशोक चौधरी प्रशांत किशोर के आरोपों का सही से जवाब नहीं दे पा रहे हैं। उधर, जेडीयू नेता नीरज कुमार लगातार अशोक चौधरी से कह रहे हैं कि नीतीश कुमार को मानस पिता मानते हैं, तो हे मानस पुत्र आप भी सामने आकर जवाब दीजिए। कुल मिलाकर बिहार की सियासत अभी पूरी तरह गर्म है। प्रदेश की दो बड़ी पार्टियों के अंदर खलबली मची हुई है।
राजनीतिक बहस तेज
बिहार में जैसे-जैसे चुनावी मौसम गर्म होता जा रहा है, राजनीतिक बहस भी तेजी से गर्म होती जा रही है, पार्टियां और नेता एक-दूसरे पर सीधे आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। नारों की जंग तेज हो गई है। जहाँ राहुल गांधी समेत विपक्ष पहले “वोट चोर” का नारा इस्तेमाल करता रहा है, वहीं सत्तारूढ़ जेडीयू ने अब विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के लिए ख़ास तौर पर “क्रेडिट चोर” शब्द गढ़ा है। तेजस्वी (राजद) लगातार दावा कर रहे हैं कि हाल के लोकलुभावन सरकारी फैसले — जैसे मानदेय में वृद्धि, सामाजिक सुरक्षा पेंशन में वृद्धि, और सरकारी नौकरियों के लिए डोमिसाइल नीति लागू करना — नीतीश कुमार सरकार में उपमुख्यमंत्री रहते हुए उनके विजन का हिस्सा हैं। वे इन नीतियों का श्रेय ले रहे हैं और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर राजद के घोषणापत्र से उनके विचारों की नकल करने का आरोप लगा रहे हैं।
जेडीयू नेताओं का तर्क
जवाब में जेडीयू नेता तर्क दे रहे हैं कि यह काम नीतीश कुमार ने किया है और तेजस्वी यादव बस इसका श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं। संघर्ष का एक और बड़ा मुद्दा अति पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) समुदाय का समर्थन है। महागठबंधन ने हाल ही में उनके पक्ष में एक प्रस्ताव जारी किया, जिस पर एनडीए की तीखी प्रतिक्रिया हुई। राजनीतिक बयानबाज़ी अब निजी भी हो गई है। जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर ने जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव और मंत्री अशोक चौधरी पर 200 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया है। चौधरी ने इन आरोपों को “निराधार बयान” बताते हुए खारिज कर दिया है और जवाब में मानहानि का दावा दायर किया है।
जेडीयू का तर्क जारी
जेडीयू का कहना है कि नीतीश कुमार के कार्यकाल में ही अति पिछड़े वर्ग को लाभकारी योजनाओं से सही मायने में सशक्त बनाया गया। एनडीए का तर्क है कि कांग्रेस के लंबे शासन और उसके बाद 15 साल की आरजेडी सरकार के दौरान अति पिछड़े वर्गों के लिए कुछ नहीं किया गया, यहाँ तक कि उनकी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए आयोग का गठन भी नहीं किया गया। प्रशांत किशोर ने कथित तौर पर भाजपा नेता संजय जायसवाल पर भी इसी तरह के आरोप लगाए हैं। पार्टी की नीतियों से अलग, सीधे, व्यक्तिगत आरोपों का यह सिलसिला चुनाव नज़दीक आने पर भी जारी रहने की उम्मीद है।
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