भारत में खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। एक ओर जहां नकली पनीर और मिलावटी दूध जैसे मामले सामने आते रहे हैं, वहीं अब अंडों की गुणवत्ता, कीमत और उपलब्धता को लेकर भी गंभीर समस्याएं उभर कर आ रही हैं।
- अंडों की गुणवत्ता पर सवाल
बाज़ार में मिलने वाले अंडों की गुणवत्ता में भारी असमानता देखी जा रही है। कई ब्रांड्स “लार्ज”, “एक्स्ट्रा लार्ज”, “प्रोटीन रिच” जैसे दावे करते हैं, लेकिन हकीकत में अंडों का आकार, ताजगी, छिलके की मोटाई और स्वाद में अंतर होता है।
कुछ रिपोर्टों के अनुसार, जिन अंडों को “बड़े अंडे” बताया जाता है, उनका वजन वास्तव में 45–50 ग्राम होता है, जबकि यह अंतरराष्ट्रीय मानकों से कम है।
कई बार अंडों में रासायनिक अवशेष और संक्रमण (जैसे सैल्मोनेला) भी पाए गए हैं, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकते हैं।
🗣️ उपभोक्ता कहते हैं: “पैकेजिंग तो शानदार होती है, लेकिन अंदर का अंडा कभी छोटा होता है, कभी बदबूदार निकलता है।”
- उत्पादन और आपूर्ति की समस्या
भारत के कई राज्यों में अंडों की मांग और उत्पादन में बड़ा अंतर है।
उदाहरण: महाराष्ट्र में प्रतिदिन लगभग 1 करोड़ अंडों की कमी बताई गई थी।
इसके कारण अंडों की कीमतें आसमान छूने लगीं हैं। हाल ही में पुणे में अंडों के दाम 66 रुपए से बढ़कर 84 रुपए प्रति दर्जन हो गए थे।
इसका कारण है:
पशु चारे की बढ़ती कीमतें
मानसून से आपूर्ति में बाधा
बिजली/कोल्ड चेन की कमी
📰 “आपूर्ति कम है, मांग ज्यादा, कीमतें बेलगाम — आम आदमी के लिए अंडा अब सस्ता प्रोटीन नहीं रहा।”
- पोषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर असर
अंडा एक सस्ता और सम्पूर्ण प्रोटीन स्रोत है, खासकर बच्चों और कमजोर वर्गों के लिए।
लेकिन भारत में प्रति व्यक्ति अंडा खपत लगभग 100–110 अंडे प्रति वर्ष है, जो विश्व स्तर से बहुत कम है।
जब अंडों की गुणवत्ता पर सवाल हो या कीमतें बढ़ जाएं, तो इसका सीधा असर मिड डे मील, पोषण कार्यक्रम और कुपोषण पर पड़ता है।
💡 “यदि अंडे महंगे या मिलावटी होंगे, तो गरीबों के लिए प्रोटीन की कमी और भी गंभीर हो जाएगी।”
🧯 4. समस्या की जड़ें
मानक और निगरानी की कमी: FSSAI जैसे निकाय हैं, लेकिन ग्राउंड पर नियंत्रण बहुत कमजोर है।
फार्मिंग में विविधता: छोटे उत्पादक, बिखरा हुआ नेटवर्क, सस्ती क्वालिटी का चारा।
ब्रांडिंग बनाम हकीकत: ब्रांड बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन गुणवत्ता की जांच कोई नहीं करता।
कोल्ड चेन की समस्या: परिवहन और भंडारण में तकनीक और सुविधा की कमी।
✅ 5. उपभोक्ताओं के लिए सुझाव
आप कैसे बेहतर और सुरक्षित अंडा चुन सकते हैं:
टूटा हुआ या गंदा अंडा न लें।
पैक पर तारीख, बैच नंबर और वजन देखें।
साफ और ठंडी जगह पर रखे अंडे खरीदें।
प्रीमियम ब्रांड की मार्केटिंग से सावधान रहें — हर महँगा अंडा बेहतर नहीं होता।
घर में ठंडे स्थान पर स्टोर करें, और समय पर उपयोग करें।
📣 निष्कर्ष
भारत में अंडों की समस्या सिर्फ कीमत या उपलब्धता तक सीमित नहीं है — यह एक स्वास्थ्य, पोषण और उपभोक्ता अधिकारों का मुद्दा है। जिस तरह से नकली पनीर पर सवाल उठे, अब अंडों की गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर भी देशव्यापी बहस ज़रूरी है।