पाकिस्तान का गुप्त हमला उल्टा पड़ा, अब अफगानिस्तान उसे नहीं छोड़ेगा! टकराव की इनसाइड स्टोरी..

इस्लामाबाद/काबुल: पाकिस्तान की हालिया गुप्त एयरस्ट्राइक से भूचाल आ गया है. टारगेट था तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का चीफ नूर वली महसूद. लेकिन ऑपरेशन नाकाम रहा. महसूद जिंदा बच गया और अब अफगान तालिबान की कस्टडी में है. इस फेल स्ट्राइक ने पाकिस्तान-अफगानिस्तान रिश्तों में जहर घोल दिया है. काबुल ने इस अटैक को अपनी संप्रभुता पर हमला बताया है. वहीं पाकिस्तान ने साफ कर दिया है कि अब तालिबान या टीटीपी से कोई बातचीत नहीं होगी, सिर्फ एक्शन होगा. इस बीच, अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी नई दिल्ली पहुंचे और पाकिस्तान की कहानी को खारिज करते हुए भारत को रीजनल स्टेबलाइजिंग फोर्स बताया. अब सवाल उठ रहा है क्या पाकिस्तान की यह मिलिट्री पॉलिसी खुद उसी के लिए जाल साबित होगी?

पाकिस्तान का ‘नो नेगोशिएशन’ फॉर्मूला
पाकिस्तान आर्मी अब हार्डलाइन मोड में आ गई है. टॉप सिक्योरिटी सोर्सेज के मुताबिक, आर्मी ने तय कर लिया है कि जब तक हाई-वैल्यू टारगेट्स खत्म नहीं होते, तब तक किसी तरह की बातचीत नहीं होगी. इसी स्ट्रैटेजी के तहत क्रॉस-बॉर्डर एयरस्ट्राइक भी जारी रहेंगी.

2025 में आतंकी हमलों में भारी बढ़ोतरी देखी गई है, खासकर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में. इंटेलिजेंस इनपुट्स बताते हैं कि बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) और बलोच लिबरेशन फ्रंट (BLF) अब टीटीपी के साथ ऑपरेशनल अलायंस बना चुके हैं. इससे पाकिस्तान को डर है कि कहीं एक कोऑर्डिनेटेड इनसर्जेंसी न शुरू हो जाए.

सिर्फ नौ महीनों में 20 से ज्यादा पाकिस्तानी आर्मी ऑफिसर्स मारे जा चुके हैं. जिनमें एक कर्नल, 10 मेजर और कई कैप्टन शामिल हैं. पब्लिक प्रेशर अब आर्मी पर है कि टीटीपी को पूरी तरह खत्म किया जाए.


अमेरिका और चीन का साइलेंट सपोर्ट
इस ऑपरेशन के बावजूद पाकिस्तान को अकेला नहीं छोड़ा गया. अमेरिका और चीन दोनों ने चुपचाप पाकिस्तानी मिलिट्री को सपोर्ट किया है. दोनों देशों के लिए पाकिस्तान की स्थिरता स्ट्रैटेजिक इंटरेस्ट है.
अमेरिका को डर है कि अगर पाकिस्तान अस्थिर हुआ तो अफगानिस्तान फिर से आतंकी ठिकाना बन जाएगा. वहीं चीन को सीपीईसी (CPEC) की सिक्योरिटी की चिंता है. दोनों देश लॉजिस्टिक, इंटेलिजेंस और फाइनेंशियल सपोर्ट दे रहे हैं.
इसलिए पाकिस्तान के लिए फंडिंग कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन सवाल ये है कि क्या बाहरी सपोर्ट से पाकिस्तान अपनी इंटरनल चेन ऑफ टेरर को खत्म कर पाएगा?
अफगानिस्तान का नया कार्ड
अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी का दिल्ली पहुंचना पाकिस्तान के लिए साफ मेसेज है. मुत्ताकी ने न सिर्फ पाकिस्तान की कहानी को खारिज किया, बल्कि भारत को रीजनल बैलेंस की ताकत बताया. काबुल अब ओपनली इंडिया, ईरान और रूस से अपने रिश्ते मजबूत कर रहा है. इन देशों ने पाकिस्तान की मिलिट्री स्ट्रैटेजी पर चिंता जताई है. इसका मतलब साफ है – पाकिस्तान का डिप्लोमैटिक सर्कल सिकुड़ रहा है. अगर अफगान तालिबान अब टीटीपी को टॉलरेंस या सपोर्ट देने लगे, तो पाकिस्तान के लिए बॉर्डर सिक्योरिटी का संकट और गहरा जाएगा.
एनालिस्ट मानते हैं कि पाकिस्तान की हार्डलाइन पॉलिसी कई फ्रंट्स खोल सकती है. काबुल से लेकर ईरान और रूस तक, हर तरफ विरोध का माहौल है. अफगान तालिबान शायद अब टीटीपी पर ‘आंख मूंदने’ की पॉलिसी अपनाए. इसका नतीजा होगा, पाकिस्तान में और ज्यादा आतंकी हमले. इस बीच, नूर वली महसूद का बच निकलना पाकिस्तान की ऑपरेशनल इमेज को झटका है. पाकिस्तान अब अपनी ही बनाई जंग में उलझता जा रहा है.

अफगान सेना ने काबुल पर पाकिस्तान के हवाई हमले के जवाब में नंगरहार और कुनार प्रांतों में पाकिस्तानी चौकियों पर हमला किया. ड्यूरंड लाइन पर भारी गोलीबारी, हालात बेहद तनावपूर्ण.

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव अब खुली जंग का रूप लेता दिख रहा है. ड्यूरंड रेखा (Durand Line) के दोनों ओर भारी गोलीबारी जारी है. ताजा जानकारी के मुताबिक अफगान सेना ने पाकिस्तान की सैन्य चौकियों पर तीखा हमला बोला है. यह गोलीबारी काबुल पर हुए पाकिस्तानी हवाई हमले के जवाब में की गई है. सीमावर्ती इलाकों में अब रॉकेट, मोर्टार और हैवी मशीनगनों की आवाजें गूंज रही हैं.

अफगान सेना के मुताबिक जवाबी कार्रवाई के तहत नंगरहार और कुनार प्रांतों में ड्यूरंड लाइन के पास पाकिस्तान की मिलिट्री पोस्ट्स पर निशाना साधा गया है. स्थानीय सूत्रों के अनुसार लड़ाई अभी भी जारी है और दोनों देशों की सीमावर्ती बस्तियों में दहशत फैल चुकी है. यह झड़पें ऐसे समय में हो रही हैं जब दोनों देशों के बीच रिश्ते पहले से ही अविश्वास और तनाव से भरे हुए हैं.

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